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 बेलगाम-एक इतिहास कालीन नगर

बेलगाम का इतिहास इसा पूर्व छह सौ वर्ष पुराना है। इस का साक्षी है पुराना किला । जैन शासकों ने इसे बनवाया था। कालान्तर से अनेक राज्यकर्ताओं ने इसे अपने हाथों में लिया, जैसे गंग, कदम्ब, रट्ट और आखिर आदिलशह। अंगरेजों ने इसे अपना कर अनेक सुधार किये। यहां १२६४ में बिचिराज ने रट्ट राजा कार्तवीर्य की इच्छा के अनुसार नेमिनाथजी का यह मन्दिर बनवाया। इस मन्दिर का मुक्तमंटप छत पर हुए कमल पंखूडियों से सजित है। अति सुन्दर नक्काशी और पालिश किए हुए खम्भे इस मन्दिर की विशेषताएं हैं। कमल बस्ती और अन्य जैन मन्दिर उत्कट वास्तुकला का उदाहरण है। हेमाडपंती रचना के अनेक उदाहरण यहां पर देखने को मिलते हैं। इस किले के अन्तर्द्वार से जो सुरंग निकलती है वह सीधे यल्लुर के निकट चौदह कि. मी. दूरी पर स्थित राजहंस गढ के अन्दर तक पहुंचती है। इस के प्रमाण आज भी कहीं कहीं देखने को मिलते हैं। किले के अन्दर आदिल शहा के सरदार ने बान्धी हुई सफा मस्जिद भी इस्लामिक स्थापत्य कला का उत्तम उदाहरण है। खिडकियों पर फूलों की नक्काशी, नक्काशीदार दरवाजें, पवित्र पंक्तियों से लिखीत खम्भे ये सारी इस मस्जिद की विशेषताएं हैं।

अंगरेजों ने जब इस किले को अपने हाथों में लिया जैसे से सारा नगर ही इनके हाथों में आया। उन्हों ने यहां के लोगों की वीर वृत्ति को देखते हुए मराठा रेजिमेंट की स्थापना की। पहले, दूसरे विश्वयुद्ध, अन्य लडाइयां और विश्व में स्थित अन्य अंगरेज देशों में भी यहां के वीरों ने अपना सहयोग दिया था। अनेक वीरों ने विक्टोरिया क्रास भी पाया था। पूरे हिन्दुस्तान में जो महत्वपूर्ण सैनिक स्थल थे उसमें इस रेजिमेंट का नाम था। आज भी स्वतन्त्र भारत का एक बडा मिलिटरी केन्द्र है। इस रेजिमेंट के साथ-साथ कमाण्डो ट्रेनिंग का भी एक यह प्रसिद्ध केन्द्र है। अंगरेजो ने ’किंग जार्ज स्कूल’ की भी स्थापना की, जो आज ’बेलगाम मिलिटरी स्कूल’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसका भवन, शिख्शा-व्यवस्था और अनुशासन देखने लायक है। इसी काल के ’सेंट पाल्स स्कूल’, ’सेंट मेरीज चर्च’ और स्थान भी अंगरेजी स्थापत्य कला का प्रतिक हैं।

 

BELGAUM FORT:-


 

At the entrance, there are two shrines- Durga and Ganapati. Inside the fort, there are Jain temples; one is ‘Kamal Basti’. These structures are built with intricate designs on the walls. (1204 AD). There is also an imposing Darga that belongs to Adilshahi period. The fort is surrounded by a deep moat.

 

मिलिटरी महादेव मन्दिर:-


 

इस नगर का एक और आकर्षण है, मिलिटरी महादेव मन्दिर। इस मन्दिर की देखभाल सैनिकों द्वारा की जाती है। अनुशासित, स्वच्छ, पवित्र और हरा-भरा यह स्थान छोटे-बडे और सैलानियों का आकर्षण है। यहां के बगीचे, हिरन पार्क देखने लायक हैं।

 

RAMKRISHNA MISSION ASHRAM:-


 

In the fort area, an imposing new structure attracts the devotees and tourists alike, that is Ramakrishna Mission Ashram. The earlier structure was a modest house, in which Swami Vivekanand stayed for a few days on the way to Kanyakumari.

 

कपिलेश्वर:-


 

मन्दिर बेलगाम नगर के बीचोबीच शहापूर मार्ग पर है। यहां का शिव मन्दिर अति प्राचीन है। कहा जाता है कि इस के दर्शन के बाद ही सारे ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की पूर्तता होती है। यह छह सौ वर्ष पुराना है। जिसे दक्षिण की काशी के नाम से जाना जाता है।

 

GANESH MANDIR:-


 


On Vengurla road, there is a small but a beautiful Ganesh Mandir, managed by military. It is a ‘Swayambhu’ Ganesh and known to be a boon giver to the devotees. It is located in a serene and pollution free area of the cantonment.

 

ST. MARY’S CHURCH:-


 

The gothic structure of the church in the cantonment area is worth seen place, which was built in 1869. Beautiful light filters, intricate glass windows and Biblical drawings are the examples of fine arts. Some other structures built in the British period are St. Xavier’s church, St. Anthony’s church, Methodist church and the school buildings of St. Paul’s, and Baynon Smith High school.

 

MALAPRABHA DAM:-


 

This dam is located at around 80 kms from Belgaum and is built to store 37.73 TMC of water to irrigate 539172 acres of land in Belgaum, Dharwad and Bijapur districts. 43 villages were submerged in the waters including Gurlahosur, the birthplace of Laxmanrao Kirloskar, a great Indian industrialist.

 

सोगल:-


 

सोमनाथ मन्दिर ऐसी पहाडियों पर स्थित है, जहां की ऊंचाइयां और काले पत्थर वाली पहाड की दीवारें मन को मोह लेती है। गत इतिहास का दर्शन भी यहां पर होता है। राष्ट्रकुटॊं ने बान्धा हुआ यह मुख्य मन्दिर ष्रद्धालुओं का मुख्य आकर्षण है।

 

गोकाक:-


 

फाल्स बरसात के दिनों में स्वर्ग है। यहां पर घटप्रभा नदी पर १५० फीट ऊंचाई से पानी नीचे गिरता है और भीषण नाद करता हुआ आगे दौडता है, तो बदन पर रोंगटें खडे हो जाते हैं। यहीं पर झूलता पूल पर चलना भी एक अनुभव है।

 

सौंदत्ती:-


 

यल्लम्मा देवी का सुप्रसिद्ध मन्दिर है, जो बेलगाम से ८० कि. मी. दूरी पर है। पूर्व काल में यह स्थल रट्ट राजाओं की राजधानीथी। यहां का किला जयगोंडा देसाई ने सन १७३४ में बनाया। आगे पारस गढ के रास्ते पर एक छोटी पहाडी आती है, जहां पर यल्लम्मा देवी का मन्दिर है। जमदग्नी मुनी की पत्नी रेणुकाम्बा और उन के पुत्र परशुराम यहां पर निवास करते थे। सात पहाडियों से घेरा हुआ यह स्थल सैलानी और भाविकों के लिए एक महत्व पूर्ण जगह है। प्रति माह यहां पर मेला हुआ करता है।

 

गोडचिन्मलकी:-


 

फाल्स भी निसर्ग का एक अप्रतिम नजारा है, जो मार्कण्डेय नदी पर है। यहां पर नदी का पानी २५ मीटर नी चे गिरता है। लेकिन यहा तक पहुंचने के लिए पथरिले मार्ग पर चल कर ट्रेकिंग का भी अनुभव लेना पडता है। इसी स्थल से आगे चल कर एक और फाल्स भी है। यह स्थल गोकाक से २० कि.मी. दूरी पर है।

 

SAFA MASJID:-


 

Safa Masjid is an example of beautiful Islamic architecture in the fort of Belgaum. It is a combination of Indo-Saracenic-Deccan style of structure. Floral carvings, rounded pillars (of old temples), and Devnagari and Kannada inscriptions are worth seeing. The 16th century Persian inscriptions from Qoran are also beautiful.

 

सौतेरा:-


 

जुडवाफाल्स बेलगाम-गोआ मार्ग पर जाम्बोटी से आगे कण्कुम्बी के पास है। यहा उतर कर पारवाड तक पैदल जाना पडता है। रास्ते में ’नान्याची चौकी’ आती है (यहां पर अंगरेजों के जमाने में गुप्त व्यापार हुआ करता था और गोआ पुर्तगालिओं के हाथ में था ) कर्नाटक-गोआ की सीमा पर धुआं धार घनों के बीच यह जुडवा फाल्स दीखता है तो मन में हर्ष की लहरें दौडने लगती है। गरमी के मौसम में यहां स्वर्ग उतर आता है। साहस भरा ट्रेकिंग करने के लिए यह अति योग्य स्थल है।

 

KITTUR FORT:-


 

Rani Chennamma of Kittur is an example of bravery against the British. Kittur is on NH 4, where the fort is situated. It is around 50 kms from Belgaum. Her magnificent palace, a museum and a deer park await us there. Her Samadhi is at Bailhongal, where she was taken a prisoner by the British.